उत्तर
कवि निम्नलिखित कारणों से आत्मकथा लिखने से बचना चाहता है:
1. कवि मानता है कि उसके जीवन में ऐसी कोई बड़ी उपलब्धि या महान कार्य नहीं हुआ है जिसे पढ़कर लोगों को प्रेरणा मिले।
2. उसका जीवन दुखों, पीड़ाओं और निराशाओं से भरा रहा है। आत्मकथा लिखने से वे सोई हुई पीड़ाएँ और पुरानी कड़वी यादें फिर से ताज़ा हो जाएंगी।
3. कवि अपने व्यक्तिगत जीवन के क्षणों को (जैसे अपनी प्रेयसी की यादें) दुनिया के सामने सार्वजनिक नहीं करना चाहता।
4. उसे लगता है कि लोग उसकी आत्मकथा पढ़कर केवल उसका मज़ाक (उपहास) ही उड़ाएंगे।
उत्तर
कवि ऐसा इसलिए कहता है क्योंकि:
1. कवि के जीवन में जो भी दुःख या पीड़ा थीं, वे अब उसके मन में शांत होकर सो गई हैं (विस्मृत हो चुकी हैं)। वह उन्हें दोबारा जगाकर दुखी नहीं होना चाहता।
2. उसे ऐसा भी लगता है कि अभी उसके जीवन में कुछ ऐसा विशेष घटित नहीं हुआ है जिसे वह समाज के सामने अपनी उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत कर सके। इसलिए आत्मकथा लिखने का यह सही समय नहीं है।
उत्तर
पाथेय का अर्थ होता है यात्रा के दौरान रास्ते का भोजन (सहारा)। स्मृति को पाथेय बनाने से कवि का आशय यह है कि वह अपने जीवन रूपी यात्रा में अपनी बीती हुई मधुर और सुखद यादों (विशेषकर अपनी प्रेयसी की स्मृतियों) के सहारे ही जी रहा है। ये यादें ही थके हुए राहगीर (स्वयं कवि) के जीवन का एकमात्र संबल (आधार) हैं, जिन्हें वह दुनिया के साथ बाँटकर खाली नहीं होना चाहता।
उत्तर
इस कथन के माध्यम से कवि यह कहना चाहता है कि उसके जीवन में भी कुछ सुखद पल आए थे, जो उसने अपनी प्रेयसी (पत्नी/प्रेमिका) के साथ मधुर चाँदनी रातों में बिताए थे। वे पल उसके जीवन की व्यक्तिगत और सबसे पवित्र (उज्ज्वल) संपत्ति हैं। उन निजी और अंतरंग पलों को आत्मकथा के माध्यम से दूसरों के सामने शब्दों में कैसे व्यक्त किया जा सकता है? वे तो केवल उसके अपने लिए हैं।