CBSE Class 10 Hindi (Course A) • Kshitij Part-2 • Poetry (Kavya)
पाठ का सारांश (Summary):
इस पाठ में सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' जी की दो अलग-अलग कविताएँ संकलित हैं:
1. उत्साह (Utsah): यह एक 'आह्वान गीत' (Call/Invocation song) है। इसमें कवि 'बादलों' का
आह्वान करते हैं। बादल निराला का प्रिय विषय है। कविता में बादल एक तरफ तो प्यास से तड़पते लोगों की इच्छा
पूरी करने वाले (जल बरसाने वाले) 'क्रांतिदूत' (Messenger of revolution) हैं, और दूसरी तरफ वे नई कल्पना और
नए अंकुर (New ideas) के लिए विनाश और नवनिर्माण (Destruction and Reconstruction) का प्रतीक हैं। कवि
बादलों से घोर गर्जना (Roar) करने को कहता है ताकि समाज में नई चेतना आए।
2. अट नहीं रही है (Aṭ Nahi Rahi Hai): यह कविता 'फागुन' (Phagun - Spring season) महीने
की मादक और सर्वव्यापक सुंदरता (Universal beauty) का वर्णन करती है। कवि मानता है कि फागुन की सुंदरता इतनी
अधिक है कि वह प्रकृति में समा नहीं पा रही है (अट नहीं रही है) और बाहर छलक (Overflow) रही है। फागुन के
आने से चारों ओर उल्लास भर गया है और पेड़ों पर नए रंग-बिरंगे पत्ते और फूल आ गए हैं।
= अर्थ: यह उत्साह कविता की मुख्य पंक्ति है। 'निराला' जी बादलों को क्रांति और नवनिर्माण का प्रतीक मानते हैं। वे कहते हैं कि हे बादल! तुम्हारे हृदय में वज्र (Thunderbolt) जैसी असीम शक्ति छिपी है। तुम उस ऊर्जा से इस समाज में ओज (शौर्य) और चेतना भरने वाली एक नई कविता (New energy) का संचार कर दो। इसलिए हे क्रांतिदूत! तुम घोर गर्जना करो।
= अर्थ: यह 'अट नहीं रही है' की पंक्ति है। कवि फागुन (वसंत) से कहता है कि हे फागुन! तुम्हारे आने से प्रकृति की सुंदरता और हवा की सुगंध इतनी मादक (Intoxicating) हो गई है कि मन उल्लास से भर जाता है। ऐसा लगता है जैसे तुम आसमान में उड़ने के लिए पंख फड़फड़ा रहे हो (या लोगों के मन में प्रसन्नता के पंख लग गए हैं जो कल्पना के आकाश में उड़ना चाहते हैं)।
प्रश्न 1: 'उत्साह' कविता में कवि ने 'बादल' से फुहार, रिमझिम या बरसने के स्थान पर 'गरजने' के लिए क्यों कहा है?
उत्तर: कवि (निराला) बादलों को ओज, शक्ति और क्रांति का प्रतीक मानते हैं। 'रिमझिम बारिश' या फुहार कोमलता और शांति को दर्शाती है, जिससे समाज में कोई बड़ा बदलाव (परिवर्तन) नहीं आता। कवि पुराने रीति-रिवाज़ों, शोषकों की क्रूरता और समाज की जड़ता को तोड़ना चाहते हैं। इसके लिए वे बादलों को भयंकर 'गर्जना' करने को कहते हैं, क्योंकि गर्जना विद्रोह, जोश और नव-निर्माण की शुरुआत की तरह है, जो सोए हुए समाज को जगा सकती है।
प्रश्न 2: "काले घुंघराले बालों" की उपमा किसके लिए और क्यों दी गई है? (उत्साह के आधार पर)
उत्तर: 'उत्साह' कविता में "काले घुंघराले बालों" की उपमा आसमान में छाए हुए काले और घने बादलों के लिए दी गई है। कवि कहते हैं—"बाल कल्पना कैसे पाले"। अर्थात् जिस प्रकार छोटे बालकों (बच्चों) के बाल घुँघराले, सुंदर और मनमोहक होते हैं, और उनकी कल्पनाएँ बहुत चंचल और हमेशा बदलती रहने वाली होती हैं, ठीक उसी तरह आसमान में छाए हुए काले-घुंघराले बादल भी किसी बाल-कल्पना के समान प्रतीत होते हैं जो हर पल अपना रूप बदलते रहते हैं।
प्रश्न 3: 'अट नहीं रही है' कविता में किस ऋतु के सौंदर्य का वर्णन है? वह 'अट' (समा) क्यों नहीं रही है?
उत्तर: 'अट नहीं रही है' कविता में फागुन (वसंत ऋतु, Spring Season) के प्राकृतिक सौंदर्य का अत्यंत सजीव वर्णन है। फागुन में प्रकृति का रूप इतना निखर उठता है कि चारों ओर हरियाली, लाल-लाल पत्ते और सुगन्धित फूल खिल जाते हैं। हवाओं में एक मादकता (Intoxication) होती है। प्रकृति की यह सुंदरता इतनी व्यापक (विशाल) और मनमोहक हो गई है कि वह प्रकृति की सीमाओं (जगह) में 'समा' (Fit) नहीं पा रही है और छलक कर बाहर आ रही है (अट नहीं रही है)।
प्रश्न 4: "आँख हटाता हूँ तो हट नहीं रही है"—कवि ने ऐसा क्यों कहा है?
उत्तर: वसंत (फागुन) ऋतु में प्रकृति का सौंदर्य इतना अधिक आकर्षक और सम्मोहक हो जाता है कि देखने वाले का मन उससे बंध जाता है। कवि प्रकृति के नए-नए रूपों (जैसे पेड़ों की हरी-लाल डालियाँ, फूलों की खुशबू) को एकटक देख रहा है। वह सुंदरता उसे इतना मुग्ध कर लेती है कि कवि चाहकर भी अपनी नज़रों को उस सौंदर्य से हटा नहीं पाता। 'आँख न हटना' फागुन मास के चरम सौंदर्य का प्रमाण है।