उत्तर
निराला जी कविताओं में क्रांति और बदलाव के समर्थक हैं। वे बादलों से सिर्फ रिमझिम या फुहार बरसने को नहीं कहते क्योंकि इससे समाज में चेतना नहीं आती। वे बादलों से गरजने का आह्वान इसलिए करते हैं क्योंकि गरजना 'क्रांति', 'शक्ति', और 'पौरुष' का प्रतीक है। समाज के सोए हुए और पीड़ित लोगों को जगाने, उनमें नया जोश (उत्साह) भरने, तथा पुरानी सड़ी-गली व्यवस्था को नष्ट करके नए युग के निर्माण के लिए बादलों का गरजना और कठोर आवाज़ करना आवश्यक है।
उत्तर
कविता का शीर्षक उत्साह इसलिए रखा गया है क्योंकि यह एक 'आह्वान गीत' है जो लोगों के मन में क्रांति और नव-निर्माण की भावना जगाना चाहता है। कवि बादलों के गरजने के माध्यम से समाज के निराश, शोषित, और पीड़ित वर्गों के मन में नई ऊर्जा, जोश, और 'उत्साह' का संचार करना चाहता है। बादलों की गर्जना संघर्ष और आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।
उत्तर
सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' जी ने फागुन मास के प्राकृतिक सौंदर्य का बहुत ही सजीव वर्णन किया है। फागुन के महीने में प्रकृति की सुंदरता इतनी अधिक होती है कि वह प्रकृति में समा (अट) नहीं पा रही है और बाहर छलक रही है। पेड़ों की डालियाँ नए और हरे-लाल पत्तों से लद गई हैं। हर जगह रंग-बिरंगे और सुगंधित फूल खिले हुए हैं, जिनकी महक हवा के साथ घर-घर में फैल रही है। पक्षी आकाश में उड़ने के लिए आतुर हैं और यह सौंदर्य मनुष्य की आँखों को इतना मोह लेता है कि आँखें हटाने पर भी नहीं हट पातीं।
उत्तर
फागुन का महीना बसंत ऋतु का चरमोत्कर्ष होता है। इस मौसम में न तो अधिक सर्दी होती है न ही अधिक गर्मी। प्रकृति का कण-कण नवजीवन से भर जाता है। पेड़ों पर नए पत्ते आ जाते हैं, चारों ओर फूल खिल जाते हैं और हवा सुगंधित हो जाती है। यह सुंदरता और मादकता (खुमारी) किसी अन्य मौसम (जैसे ग्रीष्म, वर्षा, या कड़कड़ाती सर्दी) में देखने को नहीं मिलती, इसलिए यह अन्य ऋतुओं से भिन्न और अनोखा है।