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यह दंतुरित मुसकान और फसल

CBSE Class 10 Hindi (Course A) • Kshitij Part-2 • Poetry (Kavya)

पाठ का सारांश (Summary/Context):

कवि नागार्जुन की इस पाठ में दो सुंदर कविताएँ दी गई हैं:
1. यह दंतुरित मुसकान (Veh Danturit Muskan): यह कविता वात्सल्य रस (Motherly/Parental love) से परिपूर्ण है। कवि बहुत दिनों (महीनों) के बाद अपने घर लौटता है और अपने छोटे शिशु (जिसके नए-नए दाँत निकल रहे हैं) की मधुर मुसकान देखता है। बच्चे की धूल-भरी और भोली मुसकान कवि के कठोर मन को भी पिघला कर कमल के फूल जैसा कोमल बना देती है। चूँकि बच्चा कवि को पहचानता नहीं है, इसलिए वह उसे कनखियों (Side glances) से देखता है।
2. फसल (Fasal): यह कविता हमारे जीवन का आधार 'अनाज' और 'किसानों की मेहनत' को समर्पित है। कवि बताता है कि 'फसल' कोई जादू या केवल प्रकृति की देन नहीं है; यह नदियों के जल, अनेक प्रकार की मिट्टियों के गुण-धर्म (Nutrients), सूरज की किरणों (Sunlight), हवा की लय और सबसे महत्वपूर्ण—"लाखों किसानों के हाथों के स्पर्श की महिमा" (Hard work of farmers) का सम्मिलित रूप है।

1. कवि का परिचय (Poet Introduction)

कवि: नागार्जुन (Nagarjun)

नागार्जुन 'प्रगतिशील' (Progressive) चेतना और यथार्थवाद (Realism) के प्रमुख कवि हैं। उनका मूल नाम 'वैद्यनाथ मिश्र' था और उनका जन्म 1911 में बिहार के दरभंगा ज़िले के सतलखा गाँव में हुआ था। उन्हें 'जनकवि' (People's Poet) कहा जाता है क्योंकि उनकी कविताएँ सीधे आम जनता, किसानों और शोषित वर्ग से जुड़ी हुई हैं। वे स्वभाव से घुमक्कड़ (Wanderer/यायावर) थे। 'युगधारा', 'सतरंगे पंखों वाली', और 'प्यासी पथराई आँखें' उनके प्रमुख काव्य-संग्रह हैं। उनकी भाषा अत्यंत सरल, खड़ी बोली और ग्रामीण शब्दों से युक्त है।

2. कविता 1: "यह दंतुरित मुसकान" के प्रमुख भाव (Key Themes of 'Yeh Danturit Muskan')

3. कविता 2: "फसल" के प्रमुख भाव (Key Themes of 'Fasal')

4. महत्वपूर्ण कथन एवं उनके अर्थ (Important Quotes)

"छोड़कर तालाब मेरी झोंपड़ी में खिल रहे जलजात"

= अर्थ: 'जलजात' का अर्थ है 'कमल का फूल'। कवि अपने धूलि-धूसरित (धूल से सने हुए) छोटे-से बच्चे को देखकर कहता है कि ऐसा प्रतीत हो रहा है मानो कमल का सुंदर फूल कीचड़ वाले तालाब को छोड़कर मेरे घर (झोपड़ी) में खिल गया हो। यहाँ धूल को कीचड़ और शिशु को कमल का फूल माना गया है।

"कोटि-कोटि हाथों के स्पर्श की गरिमा"

= अर्थ: यह पंक्ति 'फसल' कविता की है। कवि का आशय है कि खेतों में लहलहाने वाली फसल केवल जल, मिट्टी या सूर्य-किरणों की ही देन नहीं है, बल्कि उसमें करोड़ों (कोटि-कोटि) भारतीय किसानों और मज़दूरों के हाथों का कठोर 'परिश्रम' (मेहनत) शामिल है। उसी 'स्पर्श' (परिश्रम) की महिमा और गौरव के कारण फसल उगती है जिसका अन्न पूरा देश खाता है।

BOARD EXAM QUESTIONS

प्रश्न 1: 'यह दंतुरित मुसकान' कविता में बच्चे की मुसकान का कवि (नागार्जुन) के हृदय पर क्या प्रभाव पड़ता है?

उत्तर: बच्चे के नए निकले दाँतों (दंतुरित) वाली मुसकान को देखकर कवि का कठोर और नीरस हृदय पूरी तरह से पिघल जाता है। बच्चे की मुसकान में ऐसा सम्मोहन (Attraction) है जो 'मृतक में भी प्राण डाल दे' अर्थात् महा-निराश व्यक्ति में भी नया जोश भर दे। कवि को ऐसा लगता है जैसे बच्चे के कोमल स्पर्श से ही नीरस प्रकृति वाले बाँस या बबूल के पेड़ों (कवि के जीवन के दुखों का प्रतीक) से शेफालिका के सुंदर फूल झड़ने लगे हैं। धूल भरा शिशु कवि को झोपड़ी में खिले 'कमल के फूल' समान प्रतीत होता है।


प्रश्न 2: कवि ने बच्चे की मुसकान की तुलना किन-किन चीज़ों से की है?

उत्तर: कवि बच्चे की मुसकान और उसके कोमल स्पर्श की तुलना निम्नलिखित चीज़ों से करते हैं:
1. जलजात (कमल): धूल से सने शिशु को देखकर कवि कहता है कि मानो कीचड़ वाला कमल घर की झोपड़ी में खिल गया हो।
2. मृतक में जान डालने वाली: मुसकान में इतना जीवन और ऊर्जा है कि वह मरे हुए या घोर निराश व्यक्ति को भी प्रसन्न कर देती है।
3. शेफालिका के फूल: बच्चे का स्पर्श इतना कोमल और मनोहर है कि उसे छूते ही पत्थर-दिल इंसान या 'बाँस/बबूल' जैसे कड़े स्वभाव वाले व्यक्ति के हृदय से शेफालिका नामक अत्यंत सुकोमल फूल झड़ने लगते हैं।


प्रश्न 3: 'फसल' कविता के आधार पर बताइए कि फसल को उगाने में किन-किन तत्वों का योगदान होता है?

उत्तर: कवि (नागार्जुन) के अनुसार फसल किसी एक तत्व का परिणाम नहीं है, बल्कि यह प्रकृति और मानव दोनों के सम्मिलित योगदान से उत्पन्न होती है। इसमें निम्नलिखित तत्व शामिल होते हैं:
1. लाखों नदियों का पानी: जिससे खेतों की सिंचाई होती है।
2. विभिन्न प्रकार की मिट्टी: काली, भूरी और सँदली मिट्टी के अपने-अपने प्राकृतिक गुण और पोषक-तत्व।
3. सूर्य की किरणें: जो बीजों को विकसित कर अन्न में बदलती हैं (रूपांतरण)।
4. हवा: हवा की थिरकन (गति) जिससे फसलें लहलहाती हैं।
5. किसानों का 'श्रम' (सबसे महत्वपूर्ण): करोड़ों किसानों और खेत मज़दूरों के कठोर श्रम (उनके हाथों के स्पर्श की गरिमा) से ही अंततः फसल तैयार होती है।


प्रश्न 4: शिशु का अपनी माँ और कवि के साथ जो व्यवहार है, उसे अपने शब्दों में स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: चूँकि कवि एक घुमक्कड़ स्वभाव वाला व्यक्ति है जो 'प्रवासी' की तरह हमेशा घर से बाहर रहता है, इसलिए शिशु उसे पहली बार देखकर पहचान नहीं पाता। वह 'अजनबी' (परदेसी) मानकर कवि को लगातार बिना पलक झपकाए (अपलक) देखता रहता है। जब वह कवि को देखता-देखता थक जाता है, तब कवि अपनी आँखें हटा लेता है। शिशु अपनी माँ की गोद में सुरक्षित महसूस करता है। वह कनखियों (तिरछी नज़रों) से कवि को देखता है, और जब कवि और बच्चे की आँखें मिलती हैं (अर्थात् थोड़ा परिचय या स्नेह स्थापित होता है), तो बच्चा एक प्यारी और चंचल 'दंतुरित मुसकान' बिखेर देता है। माँ दोनों का आपस में 'परिचय' करवाने वाली एक कड़ी (माध्यम) है।