CBSE Class 10 Hindi (Course B) • Sparsh Part-2 • Prose (Gadya)
पाठ का सारांश (Summary/Context):
'गिरगिट' (The Chameleon) महान रूसी (Russian) कथाकार एंतन चेखव द्वारा लिखी गई एक बहुत ही प्रसिद्ध व्यंग्यात्मक कहानी (Satirical Story) है। यह कहानी सत्ता (Power), चापलूसी (Sycophancy), और सरकारी अफसरों (Officers) के 'स्वार्थ और दोहरे चरित्र' (Hypocrisy) पर करारी चोट करती है। कहानी का मुख्य पात्र 'इंस्पेक्टर ओचुमेलोव' है, जो न्याय करने के बजाय अपना रंग 'गिरगिट' की तरह बार-बार बदलता है। जब उसे लगता है कि अपराध करने वाला 'कुत्ता' किसी आम आदमी का है, तो वह सख्त 'न्यायप्रिय' (Strict) बन जाता है; और जब उसे लगता है कि कुत्ता किसी ताकतवर 'जनरल साहब' का है, तो वह 'डरपोक और चापलूस' बन जाता है। पाठ में रूस के तत्कालीन 'भ्रष्ट और अवसरवादी' (Opportunist) पुलिस तंत्र का मज़ाक उड़ाया गया है।
'गिरगिट' शीर्षक का अर्थ और व्यंग्य:
1. गिरगिट (Chameleon): एक ऐसा जानवर है जो ख़तरा (Danger) देखने पर या शिकार करने के लिए अपने आस-पास के माहौल (Environment) के अनुसार तुरंत अपना 'रंग' बदल लेता है, जिससे वह सुरक्षित रहे।
2. ओचुमेलोव की तुलना: लेखक ने इंस्पेक्टर ओचुमेलोव की तुलना गिरगिट से की
है। इंस्पेक्टर का अपना कोई 'सिद्धांत' (Principle) या न्याय नहीं है। वह न्याय और कानून के आधार पर फैसला
नहीं करता, बल्कि 'अपराधी की ताकत और रुतबे' (Power/Status) के हिसाब से फैसला करता है।
जब कुत्ते का मालिक 'आम आदमी' होता है, तो वह शेर (सख्त पुलिस अफसर) बन जाता है। लेकिन जैसे ही उसे पता
चलता है कि कुत्ता 'ताकतवर जनरल साहब' (General/Politician) का है, वह डर के मारे 'भीगी बिल्ली' (Coward) बन
जाता है। उसका बार-बार 'ओवरकोट (Coat) पहनना और उतारना' उसकी इसी 'घबराहट और रंग-बदलने वाली फितरत'
(Opportunism) का प्रतीक है। यही इस कहानी का मुख्य-संदेश और व्यंग्य है कि समाज में कानून और पुलिस का डर
आम आदमी के लिए होता है, लेकिन 'अमीर और ताकतवर' के लिए ये पुलिसवाले उनके 'कुत्तों' की तरह होते हैं।
प्रश्न 1: पाठ में 'ओचुमेलोव' के चरित्र की भयंकर कमज़ोरी क्या है? उसके बार-बार 'ओवरकोट' (Overcoat) पहनने और उतारने का क्या रहस्य है?
उत्तर: इंस्पेक्टर ओचुमेलोव का चरित्र एक 'दीमक लगे खोखले पुलिस अफसर' का
है। वह न्याय और सच्चाई के बजाय, ताकत और रुतबे (Power/Money) की पूजा करता है। यही उसकी सबसे भयंकर कमज़ोरी
है, कि वह ताकतवर लोगों (जैसे जनरल साहब) के सामने भीगी बिल्ली (Coward) बन जाता है।
ओवरकोट का रहस्य: पाठ में ओचुमेलोव का बार-बार 'ओवरकोट उतारना' (गर्मी लगना) और 'ओवरकोट पहनना'
(ठंड लगना) कोई मौसम (Weather) का असर नहीं था; बल्कि यह उसकी मानसिक घबराहट और डर
(Nervousness) को दर्शाता है। जब वह सुनता था कि कुत्ता 'जनरल साहब' का है, तो डर के मारे उसे
पसीना आने लगता था। और जब सुनता था कि 'कुत्ता उनका नहीं है', तो उसे ठंड (राहत) महसूस होती थी।
प्रश्न 2: सुनार 'ख्यूक्रिन' अपनी उँगली पर काटे जाने को किस प्रकार इस्तेमाल कर रहा था? क्या उसका चरित्र भी पूरी तरह सच्चा था?
उत्तर: सुनार ख्यूक्रिन को 'बरज़ोई पिल्ले' (कुत्ते) ने उँगली पर काटा था, इसमें कोई शक नहीं है। किंतु, वह कोई बहुत लाचार व्यक्ति नहीं था, बल्कि एक लालची इंसान था। वह अपनी 'खून से सनी कटी उँगली' को भीड़ के बीच में एक 'हथियार' (Weapon) या 'झंडे' की तरह हवा में उठाकर दिखा रहा था ताकि वह कुछ लोगों की सहानुभूति (Sympathy) प्राप्त कर सके और कुत्ते के मालिक से एक बड़ा 'हर्जाना' (Compensation Amount - पैसा) वसूल कर सके। अतः वह बेकसूर होने से ज्यादा 'चालाक और लालची' था।
प्रश्न 3: पुलिस के सिपाही 'येल्दिरिन' के हाथ में 'ज़ब्त की गई झरबेरियों (Gooseberries) की टोकनी' होना तत्कालीन पुलिस तंत्र के बारे में क्या संकेत (Signal) देता है?
उत्तर: 'झरबेरियाँ (Gooseberries)' छोटे और बहुत ही साधारण खट्टे-मीठे फल (Berries) होते हैं, जिन्हें गरीब रेहड़ी वाले या फुटपाथ पर बेचने वाले किसान बेचते हैं। पुलिस के सिपाही येल्दिरिन का इस 'गरीब किसान के फलों की टोकरी को ज़ब्त करके' (लूटकर/Confiscate) अपने हाथ में शान से लेकर चलना, तत्कालीन रूसी पुलिस की 'भ्रष्ट, लुटेरी और अत्याचारी' (Tyrannical and Corrupt) प्रकृति की ओर इशारा करता है। यह दर्शाता है कि पुलिस 'रक्षक' नहीं है, बल्कि वह गरीब और लाचार जनता (आवाम) का ही खून चूसती है और उन्हें बिना वजह परेशान करती है।